ईएमआई न भर पाना अक्सर जान-बूझकर नहीं होता। ऐसा आमतौर पर जिदगी की भागदौड़, ड्यू डेट भूल जाने, सैलरी में देरी या बस बहुत सारे पेमेंट का हिसाब रखने की वजह से होता है। इसीलिए NACH Mandate जैसे सिस्टम बनाए गए हैं।
अगर आपने कभी सोचा है कि यह क्या है और लेंडर यानी लोन देने वाले इस पर इतना जोर क्यों देते हैं, तो आप अकेले नहीं हैं।
इस ब्लॉग में इस चीज को बहुत आसान तरीके से समझाया गया है—जैसे कि यह कैसे काम करता है, इसे कैसे सेट करें, इसके चार्ज, आरबीआई के नियम और बिना किसी कन्फ्यूजन के इसे कैसे कैंसिल या मॉडिफाई करें।
NACH Mandate: इसका मतलब, पूरा नाम और भूमिका
NACH Mandate का मतलब
NACH Mandate का मतलब बहुत सीधा है। यह ग्राहक द्वारा दी गई एक मंजूरी है, जिससे उनके बैंक अकाउंट से नियमित अंतराल पर पैसे अपने-आप कटने (ऑटोमैटिक डेबिट) की अनुमति मिलती है।
आसान शब्दों में कहें तो, NACH Mandate बैंकों या लेंडर्स को बिना किसी मैनुअल दखल के ईएमआई, इंश्योरेंस प्रीमियम या एसआईपी पेमेंट वसूलने की सुविधा देता है।
NACH का पूरा नाम
NACH का मतलब है नेशनल ऑटोमेटेड क्लियरिंग हाउस है।
यह एक सेंट्रलाइज्ड सिस्टम है जिसे पूरे भारत में बड़ी संख्या में होने वाले और बार-बार होने वाले पेमेंट को कुशलतापूर्वक संभालने के लिए बनाया गया है।
NACH सिस्टम में एनपीसीआई की भूमिका
NACH Mandate सिस्टम को नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) मैनेज करता है।
एनपीसीआई निम्न चीजें सुनिश्चित करता है:
- ट्रांजैक्शन की सुरक्षित प्रोसेसिंग।
- स्टैंडर्ड बैंकिंग प्रक्रियाएं।
- तेज सेटलमेंट साइकिल।
eNACH ऑथराइजेशन क्या है?
eNACH Mandate, पारंपरिक Mandate का डिजिटल वर्जन है।
फिजिकल फॉर्म पर साइन करने के बजाय, यूजर eNACH Mandate रजिस्ट्रेशन को ऑनलाइन पूरा कर सकते हैं, इसके लिए वे निम्न चीजों का इस्तेमाल कर सकते हैं:
- नेट बैंकिंग
- डेबिट कार्ड ऑथेंटिकेशन
- आधार-बेस्ड वेरिफिकेशन
कैसे काम करता है NACH सिस्टम?
अब जब आप समझ गए हैं कि Mandate का क्या मतलब है, तो आइए देखते हैं कि यह असल में कैसे काम करता है।
NACH ऑथराइजेशन की चरणबद्ध प्रक्रिया
- ग्राहक NACH ई-Mandate के माध्यम से सहमति देता है।
- बैंक, डीटेल्स वेरिफाय करता है।
- एनपीसीआई ऑथराइजेशन की प्रक्रिया पूरी करता है।
- Mandate रजिस्टर्ड हो जाता है।
- भुगतान तिथि पर ऑटो-डेबिट शुरू हो जाता है।
ऑथराइजेशन और वेरिफिकेशन की प्रक्रिया
- ऑथराइजेशन निम्न चरणों से गुजरता है:
- बैंक-लेवल पर वेरिफिकेशन।
- एनपीसीआई ऑथेंटिकेशन।
- ओटीपी या नेट बैंकिंग के जरिए कस्टमर की मंजूरी।
- पेमेंट के लिए ऑटो डेबिट सिस्टम
एक बार एक्टिव होने पर, ऑटो डेबिट सिस्टम निम्न चीजें सुनिश्चित करता है:
- ईएमआई की ऑटोमैटिक कटौती।
- समय पर पेमेंट।
- मैनुअल ट्रैकिंग में कमी।
NACH रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया
eNACH Mandate रजिस्ट्रेशन पूरा करने की प्रक्रिया इस प्रकार से है:
- बैंक/फाइनेंसर के प्लेटफॉर्म के जरिए ऑनलाइन।
- साइन किए हुए Mandate फॉर्म के जरिए ऑफलाइन।
NACH Mandate कैसे सेट करें?
NACH Mandate सेट करना एक टेक्निकल या पेचिदा काम महसूस हो सकता है मगर आप इसे ऑनलाइन या ऑफलाइन पूरा दोनों तरीको से कर सकते हैं। चाहे आप ई-रजिस्ट्रेशन चुनें या फॉर्म भरे, आपको एकबार में एक सुरक्षित ढंग से ऑटोमैटिक पेमेंट करने की सुविधा मिल जाती है।
ऑनलाइन NACH Mandate (eNACH) सेट अप करने के तरीके
- बैंक/फाइनेंसर की वेबसाइट पर जाएं।
- eNACH Mandate का ऑप्शन चुनें।
- अपने बैंक अकाउंट की जानकारी डालें।
- ओटीपी/नेट बैंकिंग से ऑथेंटिकेट करें।
- अप्रूवल के लिए सबमिट करें।
बैंक या फाइनेंसर के जरिए ऑफलाइन सेटअप प्रोसेस
ऑफलाइन सेटअप के लिए:
- फॉर्म भरें।
- साइन करें और बैंक/फाइनेंसर को जमा कराएं।
- मैनुअल वेरिफिकेशन का इंतजार करें।
NACH सेटअप के लिए जरूरी जानकारी
NACH सेटअप के लिए निम्न चीजें जरूरी हैं:
- बैंक अकाउंट नंबर।
- आईएफएससी कोड।
- रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर।
- लोन/अकाउंट की जानकारी।
- अप्रूवल और एक्टिवेशन का समय
- eNACH: 24–48 घंटे
- ऑफलाइन: 5–10 वर्किंग डेज
आपको NACH ऑटो-डेबिट के लिए रजिस्टर क्यों करना चाहिए?
इस सेटअप से ना सिर्फ आपके पैसे ऑटोमैटिक कटने लगते हैं, बल्कि आपको कॉल या मैसेज के जरिए याद दिलाने की जरूरत नहीं पड़ती और समय पर ईएमआई पेमेंट से तनाव कम होता है।
कर्ज लेने वालों के लिए फायदे
- ईएमआई पेमेंट कभी मिस नहीं होता।
- समय और मेहनत की बचत होती है।
- पेनल्टी का रिस्क कम होता है।
- फाइनेंशियल डिसिप्लिन बेहतर होता है।
पेमेंट में ऑटोमेशन और सुविधा
ऑटोमेटेड क्लियरिंग सिस्टम मैनुअल पेमेंट की जरूरत को खत्म करता है, जिससे यह निम्न लोगों के लिए बहुत अच्छा है:
- नौकरीपेशा लोग।
- बिजनेस ओनर्स।
- एक से ज्यादा लोन लेने वाले लोग।
- ईएमआई पेमेंट छूटने से बचाव
NACH ई-Mandate के साथ, आपकी ईएमआई, निर्धारित तारीख को अपने-आप कट जाती है, बस आपके खाते में जरूरी रकम का होना जरूरी है। ये उन लोगों के लिए भी बेहतर है जिन्होनें एक से अधिक लोन ले रखे हों।
अगर रिकरिंग पेमेंट सेटअप नहीं है,तो पेमेंट छूटने पर निम्न चीजें हो सकती है:
- लेट पेमेंट फीस और चार्ज।
- आपके क्रेडिट स्कोर पर बुरा असर।
- भविष्य में लोन मंजूर होने की कम संभावना।
- बैंक/फाइनेंसर की तरफ से बार बार कॉल।
क्रेडिट डिसिप्लिन पर असर
यदि आप समय पर ईएमआई का भुगतान करते हैंं तो आपका क्रेडिट स्कोर अच्छा बना रहता है और इसमें NACH Mandate की भाी एक अहम भूमिका रहती है।
ईएमआई पेमेंट ऑटोमैटिक होने से भुगतान में निरंतरता बनी रहती है; फाइनेंसर आपको लोन देने के लिए इसी बात पर सबसे ज्यादा गौर करते हैं।
जरूरी बात: एक या दो ईएमआई छूटने से भी आपके क्रेडिट स्कोर में एक बुरा पैटन बन सकता है,लेकिन ऑटो-डेबिट सिस्टम से लगातार पेमेंट कटने पर एक भरोसेमंद फाइनेंशियल ट्रैक रिकॉर्ड बनता है जिस पर फाइनेंसर भी भरोसा करते हैं।
NACH सिस्टम के प्रकार और इस्तेमाल
NACH Mandate बैंकों के बीच डेबिट और क्रेडिट, दोनों तरह के ट्रांजैक्शन को मैनेज करता है, जिससे किश्ते अपने आप कटने लगती है।
डेबिट और क्रेडिट से जुड़े निर्देश
NACH डेबिट आपकी मंजूरी के बाद ईएमआई, इंश्योरेंस प्रीमियम और एसआईपी की रकम अपने-आप कटने की सुविधा देता है।
NACH क्रेडिट का इस्तेमाल सैलरी, सब्सिडी, डिविडेंड या पेंशन को सीधे अकाउंट में ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है।
लोन, इंश्योरेंस और एसआईपी में इस्तेमाल
इससे समय पर ईएमआई का भुगतान हो जाता है, इंश्योरेंस पॉलिसी लैप्स होने से बचती है और एसआईपी निवेश में मदद करता है, साथ ही बिल और सब्सक्रिप्शन जैसे रेगुलर खर्चों को भी मैनेज करता है।
NACH ऑटो-डेबिट के लिए चार्ज और पेनल्टी
ऑटोमेटेड पेमेंट सेट-अप करना काफी आसान है, लेकिन अचानक होने वाले खर्चों से बचने के लिए इससे जुड़े चार्ज और पेनल्टी को समझना जरूरी है।
Mandate के लिए आपको कोई चार्ज नहीं देना होता है , लेकिन ट्रांजैक्शन फेल होने पर, बैंक या फाइनेंसर आप पर पैनल्टी लगा सकते हैं।
प्रोसेसिंग फीस
आजकल बैंक और फाइनेंस कंपनियां डिजिटल तौर तरीको को बढ़ावा देने के लिए eNACH Mandate रजिस्ट्रेशन की सुविधा मुफ्त में देते हैं।
हालांकि, बैंक या फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन के आधार पर:
- एक बार लगने वाली मामूली सेटअप फीस ली जा सकती है।
- कुछ बैंक Mandate रजिस्ट्रेशन या वेरिफिकेशन चार्ज लगा सकते हैं।
- ऑनलाइन या ऑफलाइन फॉर्म पर भी चार्ज निर्भर कर सकते हैं कि आपने क्या चुना है।
टिप: किसी भी तरह की परेशानी से बचने के लिए NACH Mandate शुरू करने से पहले हमेशा अपने फाइनेंसर या बैंक से जानकारी ले लें।
फेल हुए ट्रांजैक्शन के लिए पेनल्टी
बैंक अकाउंट में जरूरी राशि ना होने या गलत जानकारी के कारण ऑटो-डेबिट फेल हो जाता है। इसके बाद आपको पैनल्टी का भुगतना करना पड़ता है जो इस प्रकार से है:
- फाइनेंसर द्वारा ईएमआई बाउंस फीस वसूली जाती है।
- डेबिट निर्देशों के विफल होने पर बैंक द्वारा जुर्माना लगाया जाता है।
- बकाया ईएमआई पर अतिरिक्त लेट फी या ब्याज।
महत्वपूर्ण बात: NACH ई Mandate के तहत बार-बार पेमेंट फेल होने से न केवल फाइनेंशियल पेनल्टी बढ़ सकती हैं, बल्कि आपके क्रेडिट स्कोर और रीपेमेंट हिस्ट्री पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है जिसके भविष्य में परिणाम गंभीर हो सकते हैं।
बैंक के हिसाब से लगने वाले चार्ज
NACH Mandate से जुड़े चार्ज सभी बैंकों में एक जैसे नहीं होते हैं।
ये इन बातों के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं:
- बैंक की पॉलिसी और फीस का स्ट्रक्चर।
- अकाउंट का प्रकार (सेविंग्स, करंट, आदि)
- फाइनेंसर के साथ एग्रीमेंट की शर्तें।
कुछ बैंक निम्न चीजों के लिए भी चार्ज ले सकते हैं:
- Mandate में बदलाव के अनुरोध।
- NACH Mandate रद्द करने के अनुरोध (बहुत कम मामलों में)
- फेल हुए ट्रांजैक्शन को दोबारा प्रोसेस करना।
ध्यान रहे: चूंकि ये चार्ज अलग-अलग हो सकते हैं, इसलिए NACH Mandate एक्टिवेट करने या उसमें बदलाव करने से पहले अपने बैंक की शर्तों और लोन एग्रीमेंट को देखना जरूरी है।
एस.के फाइनेंस के चार्ज या लोन पर बेहतर ब्याज दरों के बारे में जानकारी के लिए, आप हमारी नजदीकी ब्रांच में जा सकते हैं।
NACH पेमेंट में आम समस्याएं और उनके समाधान
NACH Mandate को आसानी से ऑटोमैटिक ट्रांजैक्शन के लिए ही बनाया गया है, फिर भी कभी-कभी तकनीकी खामी, बैंकिंग या अकाउंट से जुड़ी वजहों से इसमें दिक्कतें आ सकती हैं या यह फेल हो सकता है।
ये आम समस्याएं होती है और आप इनकी जानकारी प्राप्त कर तुरंत कदम उठा सकते हैं और पेनल्टी या रीपेमेंट साइकिल में रुकावट से बच सकते हैं।
पेमेंट फेल होने के कारण
आमतौर पर NACH Mandate कम बैलेंस, eNACH Mandate रजिस्ट्रेशन के समय गलत बैंक डिटेल्स देना, Mandate का इनएक्टिव होना या के ब्लॉक होने के कारण फेल हो जाता है जिसे आप आसानी से ठीक कर सकते हैं।
कुछ मामलों में, बैंक या एनपीसीआई के स्तर पर तकनीकी खराबी की वजह से भी डेबिट में रुकावट आ सकती है।
अगर ऑटो-डेबिट फेल हो जाए तो क्या होता है?
NACH Mandate फेल होने से ना केवल आप अपनी मासिक ईएमआई भरने से चूकते हैं, बल्कि इसके बाद आपको बाउंस चार्ज , लेट पेमेंट पर ज्यादा ब्याज और लेट रीपेमेंट जैसे भारी जुर्माने देने पड़ सकते हैं।
यदि ऐसा बार बार होता है तो फिर बैंक या फाइनेंसर की नजर में आपका क्रेडिट प्रोफाइल खराब माना जाएगा।
NACH से जुड़ी समस्याओं को कैसे ठीक करें?
NACH Mandate ठीक करना बेहद आसान है। बस! आपको अकाउंट में पर्याप्त बैलेंस रखना है , या फिर Mandate का एक्टिवेशन चेक करना है कि वो एक्टिव है या नहीं, और आपके बैंक अकाउंट नंबर की जानकारियों को यदि गलत हो तो ठीक करना है।
अगर जरूरत हो, तो Mandate को फिर से रजिस्टर करें या बार-बार फेल होने से बचने के लिए तुरंत अपने फाइनेंसर से संपर्क करें।
NACH ऑथराइजेशन को कैसे बदलें या कैंसिल करें?
NACH Mandate आप ही की सुविधा के लिए बनाया गया है, और इसका नियंत्रण पूरी तरह आप पर रहता है।
चाहे आपको अपनी बैंक डिटेल्स अपडेट करनी हो, अकाउंट नंबर बदलना हो या कैंसिलेशन शुरू करना हो, सही तरीकों से करने पर यह प्रोसेस आसान होता है।
आपके खाते से संबंधित जानकारी अपडेट करने के तरीके
यदि आप अपने बैंक अकाउंट से जुड़ी कोई भी जानकारी या पेमेंट को लेकर कोई चीज बदलवाना चाहते हैं, तो आप नीचे बताए गए तरीको से NACH Mandate अपडेट कर सकते हैं:
- अपने फाइनेंसर या सर्विस प्रोवाइडर से संपर्क करें - अपने मौजूदा NACH ई-Mandate को मॉडिफाय करने का अनुरोध करें।
- अपडेटेड बैंक डीटेल्स प्रदान करें - जैसे कि नया अकाउंट नंबर, आईएफएससी कोड या संबंधित जानकारी साझा करें।
- री-ऑथेंटिकेशन पूरा करें - ओटीपी/नेट बैंकिंग (NACH Mandate के लिए) के माध्यम से बदलावो को अप्रूव करें या फिर एक नया फॉर्म भरकर नई जानकारी अपने बैंक या फाइनेंसर को दें।
- अप्रूवल की प्रतीक्षा करें - बैंक से पुष्टि के बाद अपडेटेड ऑथेराइजेशन वेरिफाइड और एक्टिव हो जाता है।
टिप: सेफ्टी और कंप्लायंस सुनिश्चित करने के लिए किसी भी मॉडिफिकेशन के लिए आमतौर पर ताजा ऑथोराइजेशन की आवश्यकता होती है।
ऑटो डेबिट सेटअप कैंसिल करने के स्टेप्स
अगर आप ऑटोमैटिक डेबिट बंद करना चाहते हैं, तो नीचे बताए गए प्रोसेस से कैंसिलेशन शुरू कर सकते हैं:
- कैंसिलेशन रिक्वेस्ट - अपने बैंक/फाइनेंसर को रिक्वेस्ट सबमिट करें।
- अगर जरूरी हो अपने बैंक को सूचित करें - कुछ मामलों में सीधे बैंक से कन्फर्मेशन की जरूरत पड़ सकती है।
- कैंसिलेशन स्टेटस वेरिफाई करें - अपने प्रोवाइडर से पता करें कि Mandate सफलतापूर्वक डीएक्टिवेट हो गया है या नहीं।
जरूरी जानकारी: एस.के फाइनेंस से NACH कैंसिलेशन सिर्फ रजिस्टर्ड कस्टमर्स के लिए है जिनका पहले से ही लोन चल रहा है।
जब तक कन्फर्मेशन न मिल जाए, तब तक यह ना मानें कि कैंसिलेशन पूरा हो गया है और आपके पैसे अब भी कट अपने आप कट सकते हैं।
अस्थायी रूप से बंद करने के विकल्प
- कुछ स्थितियों में, हो सकता है कि आप Mandate को पूरी तरह से रद्द न करना चाहें, बल्कि उसे कुछ समय के लिए रोकना चाहें।
- कुछ बैंक/फाइनेंसर आर्थिक तंगी या किसी बदलाव के दौरान इसे अस्थायी रूप से रोकने की सुविधा देते हैं।
- इसके लिए आमतौर पर फाइनेंसर की औपचारिक मंजूरी की जरूरत होती है।
- e NACH के अस्थायी रूप से बंद होने के बाद ऑटोमैटिक पेमेंट फिर शुरू हो सकता है।
ध्यान रहे: सभी संस्थान यह सुविधा नहीं देते हैं, इसलिए पहले ही अपने फाइनेंसर की पॉलिसी देख लेना जरूरी है।
NACH बनाम ईसीएस बनाम फिजिकल चैक्स: प्रमुख अंतर
| फीचर | NACH मेंडेट | ईसीएस | फिजिकल चैक्स |
| गवर्निंग बॉडी | एनपीसीआई (सेंट्रलाइज्ड सिस्टम) | आरबीआई द्वारा रीजनल क्लियरिंग हाउस के जरिए मैनेज किया जाता है। | बैंक-लेवल प्रोसेसिंग |
| सिस्टम के प्रकार | सेंट्रलाइज्ड,स्टैंडर्डडाइज्ड | डीसेंट्रलाइज्ड (शहर/क्षेत्र-आधारित) | पूरी तरह मैनुअल |
| प्रोसेसिंग स्पीड | तेज, बैच-आधारित (टी+0/टी+1) | रीजनल साइकिल के कारण धीमी गति | सबसे धीमा (क्लियरिंग पर निर्भर) |
| कवरेज | पैन-इंडिया | सिर्फ कुछ खास ईसीएस लोकेशन तक सीमित | बैंक-विशिष्ट |
| सेटअप | डिजिटल (eNACH) या फिजिकल Mandate | जरूरी फिजिकल फॉर्म | चेक जमा करना |
| ऑथेंटिकेशन | नेट बैंकिंग / डेबिट कार्ड (eNACH) या फिजिकल वेरिफिकेशन | फिजिकल वेरिफिकेशन | सिग्नेचर वेरिफिकेशन |
| ट्रेकिंग | एंड टू एंड डिजिटल ट्रेकिंग | लिमिटेड विजिबिलिटी | कोई रियल-टाइम ट्रैकिंग नहीं |
| बाउंस हैंडलिंग | स्टैंडर्डडाइज्ड रिटर्न कोड | कम स्टैंडर्डडाइज्ड | मैनुअल मिलान |
| एफिशिएंसी | हाई | मॉडरेट | लो |
NACH ने ईसीएस और चेक-बेस्ड Mandate की जगह क्यों ली?
ईसीएस और चेक-बेस्ड सिस्टम में कुछ बुनियादी कमियां थीं:
- ईसीएस कई रीजनल क्लियरिंग हाउस के जरिए काम करता था, क्लीयरेंस में देरी जैसी समस्याएं आती थीं।
- फिजिकल चेक को मैनुअल रूप से संभालना पड़ता था, जिससे गलतियां, धोखाधड़ी का जोखिम और प्रोसेसिंग में लगने वाला समय बढ़ जाता था।
NACH ने इन समस्याओं का समाधान निम्न तरह से किया:
- एनपीसीआई के जरिए सेंट्रलाइज्ड प्रोसेसिंग, जिससे पूरे भारत में एक जैसे नियम लागू हुए।
- ईसीएस और चेक क्लियरिंग की तुलना में एक बेहतर सेटलमेंट साइकिल बनी।
- डिजिटल Mandate रजिस्ट्रेशन (eNACH), से कागजी काम और काम पूरा होने में लगने वाला समय कम हुआ।
- स्टैंडर्डाइज्ड रिटर्न और डिस्प्यूट मैनेजमेंट से पारदर्शिता बढ़ी।
- बेहतर ऑडिट ट्रेल्स और आरबीआई के दिशा-निर्देशों की पालना होने लगी।
क्या NACH सिस्टम सुरक्षित है?
हां, ये बेहद सुरक्षित है और इसका पूरा कंट्रोल अकाउंट होल्डर के पास ही होता है।
NACH सिस्टम की सिक्योरिटी फीचर्स
- आरबीआई के फ्रेमवर्क के तहत एनपीसीआई द्वारा संचालित।
- एक्टिवेशन से पहले यूजर की मंजूरी जरूरी।
- ओटीपी या नेट बैंकिंग ऑथेंटिकेशन।
- सुरक्षित बैंक-टू-बैंक प्रोसेसिंग।
- पूरे ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड।
निष्कर्ष: ग्राहक की मंजूरी के बिना पैसे का लेन देन नहीं हो सकता है। ।
e-NACH प्रोसेस की सुरक्षा
e-NACH Mandate प्रोसेस सुरक्षा मानकों को बनाए रखते हुए डिजिटल ऑथराइजेशन यानी आपकी व्यक्तिगत मंजूरी की सुविधा देता है:
- इलेक्ट्रॉनिक ऑथेंटिकेशन से मानवीय गलतियां कम होती हैं।
- रियल-टाइम वैलिडेशन से डेटा की सटीकता बेहतर होती है।
- तुरंत एक्टिवेशन होने से प्रोसेसिंग में देरी नहीं होती है।
- यूजर जरूरत पड़ने पर इसे ट्रैक या मॉडिफाई कर सकते हैं, या कैंसिलेशन शुरू कर सकते हैं।
एस.के फाइनेंस में NACH के साथ भुगतान को आसान बनाएं
एस.के फाइनेंस में, NACH Mandate से यह तय हो जाता है कि आपकी ईएमआई कभी न छूटे ।
हम आपको को कॉल करके फॉलो-अप नहीं लेते ना ही कोई लेट फीस लेते हैं। यदि ईएमआई में देरी हो भी जाए तो इसका आपके क्रेडिट स्कोर पर नहीं पड़ने देते।
eNACH-Mandate के साथ, एक बार एक्टिवेट होने पर, आपके भुगतान हर बार समय पर होते हैं और आपका रीपेमेंट रिकॉर्ड बरकरार रहता है।
एक भी ईएमआई छूटने पर पेनल्टी से काफी नुकसान हो सकता है,ऐसे में एस.के फाइनेंस अपने ग्राहकों का हमेशा ख्याल रखता है।
अस्वीकरण
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